Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत लाखों शिक्षामित्रों और अंशकालिक अनुदेशकों को होली के बाद एक बड़ा तोहफा दिया है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री की पिछली घोषणा पर आधिकारिक मुहर लगा दी गई है। अब 1 अप्रैल 2026 से नया मानदेय लागू माना जाएगा, जिसका भुगतान 1 मई 2026 से सीधे बैंक खातों में शुरू हो जाएगा।
मानदेय में ऐतिहासिक वृद्धि: किसे क्या मिलेगा?
कैबिनेट के फैसले के बाद शिक्षामित्रों और अनुदेशकों के मानदेय में लगभग दोगुना तक की बढ़ोतरी की गई है।
| पद का नाम | पुराना मानदेय (प्रति माह) | नया मानदेय (1 अप्रैल से) |
|---|---|---|
| शिक्षामित्र | ₹10,000 | ₹18,000 |
| अंशकालिक अनुदेशक | ₹9,000 | ₹17,000 |
सरकारी खजाने पर ₹1475 करोड़ का अतिरिक्त बोझ
बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि इस फैसले से राज्य सरकार के बजट पर भारी वित्तीय भार पड़ेगा, जिसे सरकार ने शिक्षाकर्मियों के हित में स्वीकार किया है:
शिक्षामित्रों के लिए: प्रदेश में कुल 1,42,929 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। इनके मानदेय में वृद्धि से सरकार पर सालाना 1257.77 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भार आएगा।
अनुदेशकों के लिए: उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत 24,717 अंशकालिक अनुदेशकों के लिए 217.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय होगा।
कुल भार: राज्य सरकार कुल ₹1475.27 करोड़ से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार वहन करेगी।
शिक्षामित्रों के मानदेय का सफर: 1500 से 18000 तक
शिक्षामित्रों का मानदेय पिछले 27 वर्षों में कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। यहाँ उनके आर्थिक सफर की एक झलक दी गई है:
1999: ₹1500 से शुरुआत (11 माह का अनुबंध)।
2005: मुलायम सिंह सरकार में ₹2400 हुआ।
2007: मायावती सरकार में ₹3000 हुआ।
2014-15: सपा सरकार में समायोजन के बाद वेतन ₹30,000-40,000 तक पहुँचा, लेकिन 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे रद्द कर दिया।
2017: योगी सरकार ने समायोजन रद्द होने के बाद मानदेय ₹3500 से बढ़ाकर ₹10,000 किया।
2026: कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब ₹18,000 निर्धारित।
शिक्षक दिवस की घोषणा पर लगी मुहर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल 5 सितंबर (शिक्षक दिवस) के अवसर पर मानदेय बढ़ाने की घोषणा की थी। सरकार ने इस वादे को निभाते हुए नए वित्तीय वर्ष (2026-27) की शुरुआत के साथ ही इसे अमलीजामा पहना दिया है। इस फैसले से न केवल शिक्षाकर्मियों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी, बल्कि परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता में भी सुधार आने की उम्मीद है।




