Prabhat Vaibhav,Digital Desk : राज्य सरकार ने राजस्व प्रशासन में समानता, पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट और सख्त रुख अपनाया है। उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सभी राजस्व पदाधिकारियों को संदेश देते हुए कहा कि समान परिस्थितियों वाले मामलों में समान निर्णय देना अनिवार्य है। किसी भी स्तर पर मनमानी या भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सिर्फ प्रशासनिक निर्देश नहीं हैं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद-14 के तहत प्रत्येक राजस्व पदाधिकारी का संवैधानिक दायित्व है।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के 'सात निश्चय' कार्यक्रम के अंतर्गत 'सबका सम्मान–जीवन आसान' के लक्ष्य को तभी साकार किया जा सकता है, जब आम नागरिकों को यह भरोसा हो कि भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में निष्पक्ष, पारदर्शी और एकरूप कार्रवाई की जाएगी।
भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, जमाबंदी, अतिक्रमण हटाना और सार्वजनिक भूमि से जुड़े मामलों में स्पष्ट और विधिसम्मत आदेश पारित करना सभी राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने सभी जिलों के समाहर्ताओं और अधीनस्थ राजस्व पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि समान मामलों में अलग-अलग निर्णय की कोई गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। किसी व्यक्ति की पहचान, सामाजिक हैसियत या दबाव के आधार पर निर्णय लेना पूरी तरह अनुचित है। ऐसे मामलों में कड़ी प्रशासनिक जवाबदेही तय की जाएगी।
दिशा-निर्देश और अनुपालन
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने समानता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विभाग के प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने पत्र में कहा कि सभी राजस्व पदाधिकारी संविधान के अनुच्छेद-14 और समता के सिद्धांत (Principle of Parity) का पालन करेंगे, ताकि समान परिस्थितियों वाले मामलों में समान निर्णय सुनिश्चित हो सके।
भूमि सुधार जन कल्याण संवाद–2025 में यह तथ्य सामने आया कि कई मामलों में विधिक ज्ञान और प्रशिक्षण की कमी के कारण समान परिस्थितियों में भिन्न आदेश दिए गए। यह न केवल संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है, बल्कि इससे जनता का प्रशासन पर भरोसा भी कमजोर होता है।
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार:
भूमि विवाद, दाखिल-खारिज, जमाबंदी, अतिक्रमण हटाना, पट्टा देयता और सार्वजनिक भूमि से जुड़े सभी मामलों में एकरूप, निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई अपेक्षित होगी।
पहचान देखकर आदेश देना, दबाव में अलग व्यवहार करना या समान मामलों में भिन्न निर्णय लेना पूर्णतः निषिद्ध है।
आदेश पारित करते समय राजस्व पदाधिकारी सकारात्मक निर्णय लें, तथ्यों की तुलनात्मक विवेचना करें।
यदि किसी समान मामले में अलग निर्णय लिया गया हो, तो उसका स्पष्ट कारण अभिलेख पर दर्ज करना अनिवार्य है।
इन दिशा-निर्देशों के प्रभावी पालन की जिम्मेदारी जिला समाहर्ताओं को सौंपी गई है।
अपेक्षित लाभ
राज्य सरकार का मानना है कि इन निर्देशों के पालन से:
भूमि और राजस्व मामलों में पारदर्शिता बढ़ेगी
आम नागरिकों को समयबद्ध और न्यायसंगत समाधान मिलेगा
राजस्व प्रशासन अधिक जवाबदेह, संवेदनशील और संविधानसम्मत बनेगा
यह कदम राज्य प्रशासन को लोकतांत्रिक, उत्तरदायी और संवैधानिक बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।




