Prabhat Vaibhav,Digital Desk : बिहार से दिल्ली और लखनऊ की यात्रा करने वालों के लिए बड़ी राहत की खबर है। बक्सर और छपरा को जल्द ही पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ दिया जाएगा। अधिकारियों के अनुसार, जून–जुलाई 2026 तक यह कनेक्टिविटी पूरी होने की उम्मीद है, जिससे पटना–बक्सर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-922) पर लंबे समय से बनी करीब 20 किलोमीटर की बॉटलनेक समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
फिलहाल बक्सर के पास से गाजीपुर के हैदरिया तक सड़क की संकरी लेन और एक सिंगल लेन पुलिया के कारण आए दिन जाम की स्थिति बनती है। अब इस हिस्से में लगभग 17 किलोमीटर लंबा आंशिक एक्सेस कंट्रोल चार लेन हाईवे बनाया जा रहा है, जिससे यातायात सुगम होगा।
यात्रा समय में होगी बड़ी बचत
इस नई सड़क परियोजना के पूरा होने के बाद बिहार से आगरा, लखनऊ, अयोध्या और दिल्ली की दूरी 15 से 17 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। इससे सफर का समय करीब 45 मिनट तक घटने की उम्मीद है।
मांझी घाट तक बनेगा फोरलेन हाईवे
यह परियोजना गाजीपुर जिले के हृदयपुर से शुरू होकर करीमुद्दीनपुर, चितबड़ागांव, फेफना, बलिया और बैरिया होते हुए बिहार के मांझी घाट तक पहुंचेगी। करीमुद्दीनपुर के पास बने इंटरचेंज के जरिए बक्सर और आसपास के जिलों से आने वाले वाहन सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे पर चढ़ सकेंगे।
इससे न केवल बक्सर और सारण बल्कि भोजपुर, पटना और बिहार के अन्य जिलों को भी अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
85 प्रतिशत काम पूरा
एनएचएआई के अनुसार, गाजीपुर–बलिया–मांझी घाट ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल हाईवे परियोजना का करीब 85 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। मानसून के दौरान बाढ़ और मिट्टी की कमी के कारण कुछ देरी हुई, लेकिन अब काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
करीब 5300 करोड़ रुपये की लागत से बन रहा यह 134.39 किलोमीटर लंबा चार लेन कॉरिडोर 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें आधुनिक ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, सीसीटीवी, दुर्घटना पहचान प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक टोल जैसी सुविधाएं होंगी।
बक्सर में नया पुल बनेगा अहम कड़ी
बक्सर में गंगा नदी पर बन रहा नया तीन लेन पुल इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी होगा। इसके चालू होते ही भारी वाहनों का दबाव कम होगा और एक्सप्रेसवे से सीधा, सुरक्षित आवागमन संभव हो सकेगा।
एनएचएआई अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य यही है कि जून तक इस परियोजना को पूरा कर लिया जाए, ताकि बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच सड़क संपर्क को नई गति मिल सके।




