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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : अमेरिका और ईरान के बीच चल रही ऐतिहासिक युद्धविराम वार्ता में एक चेहरे ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है—वह हैं डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर। आधिकारिक तौर पर किसी सरकारी पद पर न होने के बावजूद, कुशनर को उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और शांति दूत स्टीव विटकॉफ के साथ इस महत्वपूर्ण मिशन पर भेजा गया है। उनकी इस भूमिका ने न केवल अमेरिका में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चाओं और विवादों को जन्म दे दिया है।

युद्धविराम वार्ता में ट्रंप के 'तीन सिपहसालार'

ईरान के साथ शांति समझौते के लिए ट्रंप प्रशासन ने अपनी सबसे भरोसेमंद टीम को मैदान में उतारा है:

जेडी वैंस (उपराष्ट्रपति): युद्ध के मुखर विरोधी माने जाने वाले वैंस इस वार्ता का नेतृत्व कर रहे हैं। ट्रंप उन्हें "शांति के चेहरे" के रूप में पेश कर रहे हैं।

स्टीव विटकॉफ: ट्रंप के करीबी मित्र और मध्य पूर्व के लिए अमेरिकी शांति दूत, जो अरब देशों के साथ ट्रंप के संदेशों का आदान-प्रदान करते हैं।

जेरेड कुशनर: ट्रंप के दामाद और व्यवसायी, जिन्हें पर्दे के पीछे की कूटनीति और व्यापारिक समझौतों का माहिर माना जाता है।

ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची मेज के दूसरी तरफ मौजूद हैं।

जेरेड कुशनर: आधिकारिक पद नहीं, फिर भी इतनी अहमियत क्यों?

45 वर्षीय कुशनर को लेकर सबसे बड़ा सवाल उनकी योग्यता और उनके हितों के टकराव को लेकर उठ रहा है। कुशनर के पास कूटनीति का कोई औपचारिक अनुभव नहीं है, लेकिन वे ट्रंप के पिछले कार्यकाल में 'अब्राहम समझौते' (इजराइल और अरब देशों के बीच ऐतिहासिक शांति संधि) के सूत्रधार रहे थे।

फरवरी 2026 में ट्रंप ने उन्हें अनौपचारिक रूप से "विशेष शांति दूत" घोषित किया था, हालांकि सरकारी रिकॉर्ड्स में इसकी पुष्टि नहीं है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप कुशनर को इसलिए भेज रहे हैं क्योंकि वे 'शांति' को एक बिजनेस डील की तरह देखते हैं। ट्रंप का लक्ष्य केवल युद्ध रोकना नहीं, बल्कि ऐसे समझौते करना है जिससे अमेरिकी व्यापारियों और उनके सहयोगियों को आर्थिक लाभ हो।

व्यापारिक हित और अरब देशों से संबंध

कुशनर की उपस्थिति पर विवाद का एक बड़ा कारण उनका व्यवसाय है। उनकी कंपनी 'एफ़िनिटी पार्टनर्स' में सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों ने अरबों डॉलर का निवेश किया है। 1 अरब डॉलर से अधिक की संपत्ति के मालिक कुशनर के मध्य पूर्व के शासकों के साथ बेहद करीबी और व्यक्तिगत संबंध हैं।

आलोचकों का आरोप है कि कुशनर की मौजूदगी से अमेरिका की विदेश नीति पर इजराइल और अरब देशों के व्यापारिक हितों का प्रभाव बढ़ सकता है। उनके यहूदी समुदाय से संबंधों को लेकर भी चर्चाएं गरम हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या यह समझौता निष्पक्ष होगा?

पाकिस्तान की भूमिका और वार्ता का पक्ष

इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान एक 'कड़ी' के रूप में उभर रहा है। पाकिस्तान में हो रही इन बैठकों में अमेरिकी पक्ष ने ईरान के साथ संबंधों को सामान्य करने के लिए पाकिस्तान की भौगोलिक और कूटनीतिक स्थिति का सहारा लिया है। हालांकि, यह साफ नहीं है कि पाकिस्तान ने खुलकर किसका साथ दिया, लेकिन वह अमेरिका-ईरान के बीच एक पुल (Bridge) की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है ताकि ट्रंप प्रशासन से उसे आर्थिक और सामरिक लाभ मिल सके।