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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विकास कार्यों के लिए आवंटित भारी-भरकम बजट के खर्च को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न विभाग विकास कार्यों (पूंजीगत व्यय) के लिए आवंटित कुल धनराशि का लगभग 32.55% हिस्सा खर्च करने में विफल रहे हैं। यानी विकास की रफ्तार बढ़ाने के लिए तय किए गए 2.59 लाख करोड़ रुपये में से केवल 1.75 लाख करोड़ रुपये (67.45%) ही धरातल पर पहुंच पाए।

विकास बजट का गणित: आवंटन बनाम खर्च

मदकुल आवंटन (करोड़ ₹)कुल खर्च (करोड़ ₹)खर्च का प्रतिशत
पूंजीगत व्यय (विकास कार्य)2,59,487.381,75,013.3567.45%
राजस्व व्यय6,20,448.054,86,194.5178.36%
समग्र बजट8,79,935.446,61,200.8775.1%

प्रदर्शन का 'रिपोर्ट कार्ड': कौन रहा आगे, कौन पीछे?

फिसड्डी विभाग (50% से भी कम खर्च):

इन विभागों की उदासीनता के चलते विकास कार्य प्रभावित हुए:

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

पीडब्ल्यूडी (भवन निर्माण)

सिंचाई (निर्माण कार्य)

मत्स्य और डेरी उद्योग

हैंडलूम और कारागार विभाग

अव्वल विभाग (90% से अधिक खर्च):

इन विभागों ने बजट का कुशलतापूर्वक उपयोग कर विकास को गति दी:

स्वास्थ्य (परिवार कल्याण)

गृह (होमगार्ड)

समाज कल्याण (दिव्यांगजन सशक्तिकरण)

तकनीकी शिक्षा

पर्यटन विभाग

सरकार की सख्ती: 2027 चुनाव पर नजर

अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए योगी सरकार इस प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री स्तर पर लगातार समीक्षा बैठकों के बावजूद विभागों द्वारा बजट का पूर्ण उपयोग न कर पाना प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।

अब क्या होगा?

नई कार्ययोजना: सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अभी से सभी विभागों से नई और ठोस कार्ययोजनाएं मांगी हैं।

डेडलाइन: लक्ष्य रखा गया है कि अगले महीने से ही सभी विकास योजनाओं का काम पूरी गति से शुरू हो जाए ताकि चुनाव से पहले परियोजनाओं को पूरा किया जा सके।

जवाबदेही: बजट सरेंडर करने वाले विभागों के शीर्ष अधिकारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।