Prabhat Vaibhav,Digital Desk : एक तरफ जहां ईरान के साथ युद्धविराम (Ceasefire) की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में रौनक लौट आई है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने ही देश में राजनीतिक चक्रव्यूह में फंसते नजर आ रहे हैं। 40 दिनों के भीषण युद्ध के बाद दो सप्ताह के लिए जंग रोकने के ट्रंप के फैसले को विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने 'अमेरिका की हार' करार दिया है। अमेरिका में अब ट्रंप के इस्तीफे और उन पर महाभियोग (Impeachment) चलाने की मांग जोर पकड़ने लगी है।
विपक्ष का आरोप: 'ईरान के सामने ट्रंप का सरेंडर'
अमेरिकी सीनेटर क्रिस मर्फी ने इस युद्धविराम को लेकर ट्रंप प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। सीएनएन (CNN) से बातचीत में मर्फी ने कहा कि यह युद्धविराम नहीं, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ईरान के सामने 'पूर्ण आत्मसमर्पण' है। उन्होंने दावा किया कि इस समझौते के तहत ट्रंप ने ईरान की विवादास्पद मांगों को स्वीकार कर लिया है, जिससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान का नियंत्रण और मजबूत हो गया है। मर्फी के अनुसार, यह फैसला वैश्विक सुरक्षा के लिए एक 'भयावह स्थिति' पैदा कर सकता है।
महाभियोग और पद से हटाने की मांग
सिर्फ सीनेटर ही नहीं, बल्कि अमेरिकी प्रतिनिधि सभा की सदस्य ग्वेन मूर ने भी ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति को पद के लिए 'अयोग्य' घोषित करते हुए रिपब्लिकन सांसदों से अपील की है कि वे डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करें। मूर ने कहा कि ट्रंप की 'बेतुकी नीतियां' देश के हितों को नुकसान पहुंचा रही हैं और अब समय आ गया है कि उन्हें सत्ता से बेदखल किया जाए।
व्हाइट हाउस का पलटवार: 'यह अमेरिका की बड़ी जीत'
विपक्ष के भारी विरोध के बीच व्हाइट हाउस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने इसे राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी सेना की 'महान जीत' करार दिया। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) अपने लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। लेविट ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने पहले ही इस सैन्य अभियान के 4 से 6 सप्ताह तक चलने का अनुमान लगाया था और वर्तमान युद्धविराम इसी रणनीति का हिस्सा है। उनके अनुसार, अमेरिकी सैन्य दबाव के कारण ही ईरान बातचीत की मेज पर आया है।
इज़रायल के संयम पर टिकी है शांति
इस पूरे विवाद के बीच अमेरिका के पूर्व आतंकवाद-विरोधी प्रमुख जो केंट ने एक महत्वपूर्ण चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि इस युद्धविराम को स्थायी शांति में बदलना है, तो अमेरिका को इज़रायल पर लगाम कसनी होगी। केंट के अनुसार, यदि इज़रायल ने संयम नहीं बरता और ईरान पर हमले जारी रखे, तो यह समझौता चंद घंटों में टूट सकता है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें 10 अप्रैल को पाकिस्तान में होने वाली बैठक पर टिकी हैं, जहां इस 'शांति समझौते' की अंतिम रूपरेखा तय की जाएगी।




