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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : वैश्विक राजनीति के बदलते समीकरणों के बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियों ने भारतीय सुरक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। हालिया रिपोर्टों और राजनयिक गतिविधियों से संकेत मिल रहे हैं कि यदि ट्रंप प्रशासन का रुख पाकिस्तान समर्थक बना रहता है, तो यह दक्षिण एशिया में भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

ईरान-अमेरिका के बीच पाकिस्तान की 'मध्यस्थता' और भारत का डर

भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में पाकिस्तान की संभावित भूमिका है। यदि पाकिस्तान इन दोनों देशों के बीच मध्यस्थ बनकर किसी समझौते पर पहुंचता है, तो इससे पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर का अंतरराष्ट्रीय कद बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाकर पाकिस्तान फिर से वाशिंगटन से भारी वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकता है, जिसका इस्तेमाल भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों और टेरर फंडिंग के लिए होने की आशंका है।

आतंकवाद के फिर से सिर उठाने का खतरा

सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान को मिलने वाली किसी भी प्रकार की अमेरिकी मदद 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान नष्ट किए गए आतंकी ठिकानों को फिर से सक्रिय कर सकती है। यह आशंका जताई जा रही है कि वित्तीय सहायता मिलने पर सीमा पार से घुसपैठ बढ़ सकती है और पहलगाम जैसी आतंकी घटनाओं की पुनरावृत्ति का खतरा पैदा हो सकता है। चिंता की बात यह भी है कि ट्रंप प्रशासन अपनी रणनीतिक जरूरतों के चलते पाकिस्तान की इन हरकतों को नजरअंदाज कर सकता है।

मोदी बनाम ट्रंप: कूटनीतिक दूरियां और जगन्नाथ यात्रा

डोनाल्ड ट्रंप का पाकिस्तान के प्रति नरम रुख उस वक्त भी चर्चा में आया जब उन्होंने पाकिस्तानी सेना प्रमुख को व्हाइट हाउस में विशेष भोज के लिए आमंत्रित किया। इसी दौरान ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी वाशिंगटन आने का न्योता दिया था। हालांकि, पीएम मोदी ने इसे स्वीकार नहीं किया। 20 जून 2025 को ओडिशा के भुवनेश्वर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने स्पष्ट किया था कि उन्होंने वाशिंगटन जाने के बजाय भगवान जगन्नाथ की भूमि ओडिशा की यात्रा को प्राथमिकता दी, जो भारत की स्वतंत्र और स्वाभिमानी विदेश नीति का संकेत माना गया।

इन चार मुद्दों पर भारत पर बढ़ सकता है दबाव

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जनरल मुनीर के प्रभाव में आकर ट्रंप प्रशासन भारत को निम्नलिखित मोर्चों पर घेरने की कोशिश कर सकता है:

सिंधु जल समझौता: जल बंटवारे को लेकर पुराने विवादों को फिर से हवा देना।

क्रिकेट कूटनीति: पाकिस्तान पर लगे क्रिकेट प्रतिबंधों को हटवाने के लिए दबाव बनाना।

बलूचिस्तान और कश्मीर: इन संवेदनशील मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाकर भारत की घेराबंदी करना।

वित्तीय सहायता: पाकिस्तान को सैन्य और आर्थिक पैकेज देकर उसकी ताकत बढ़ाना।

भारत की तैयारी: हर स्थिति से निपटने को तैयार सुरक्षा एजेंसियां

इन उभरते खतरों को देखते हुए भारत ने अपनी सतर्कता बढ़ा दी है। सीमा पर सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं और 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद की स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। भारत सरकार राजनयिक स्तर पर भी दुनिया को यह समझाने में जुटी है कि पाकिस्तान को मिलने वाली कोई भी वित्तीय मदद वैश्विक आतंकवाद के लिए खाद-पानी का काम करेगी। भारत अपनी सुरक्षा और हितों की रक्षा के लिए सैन्य और कूटनीतिक, दोनों स्तरों पर पूरी तरह मुस्तैद है।