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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में एक नए राजनैतिक युग का उदय हुआ है। मंगलवार, 17 फरवरी 2026 को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान ने देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर कमान संभाल ली है। इस नई सरकार की सबसे खास बात इसकी समावेशी सोच रही है। अपनी छवि को वैश्विक स्तर पर सुधारने और देश के भीतर विश्वास बहाली के लिए तारिक रहमान ने अपने मंत्रिमंडल में अल्पसंख्यक समुदाय के दो दिग्गज चेहरों को शामिल कर सबको चौंका दिया है।

संसद के साउथ प्लाजा में हुआ ऐतिहासिक शपथ ग्रहण

आमतौर पर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री राष्ट्रपति भवन यानी 'बांग भवन' में शपथ लेते हैं, लेकिन 60 वर्षीय तारिक रहमान ने इस पुरानी परंपरा को किनारे कर दिया। उन्होंने ढाका स्थित राष्ट्रीय संसद के दक्षिण प्लाजा (South Plaza) में जनता के बीच प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इससे पहले मंगलवार तड़के बीएनपी के नवनिर्वाचित सांसदों ने उन्हें सर्वसम्मति से अपना नेता चुना था।

कैबिनेट में हिंदू चेहरा: कौन हैं निताई रॉय चौधरी?

अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले निताई रॉय चौधरी को तारिक रहमान ने अपनी कैबिनेट में अहम स्थान दिया है। जनवरी 1949 में जन्मे निताई रॉय पेशे से एक वरिष्ठ और नामी वकील हैं। वे लंबे समय से बीएनपी की सर्वोच्च नीति निर्माण समिति के सक्रिय सदस्य रहे हैं। इस चुनाव में उन्होंने पश्चिम मागुरा सीट से कट्टरपंथी दल जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार को करारी शिकस्त देकर अपनी ताकत दिखाई है। वे पहले भी सांसद रह चुके हैं और उन्हें पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों में गिना जाता है।

पहाड़ी क्षेत्रों की आवाज: दीपेन दीवान चकमा भी बने मंत्री

बौद्ध समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले दीपेन दीवान चकमा रहमान कैबिनेट के दूसरे प्रमुख अल्पसंख्यक मंत्री हैं। उन्होंने दक्षिण-पूर्वी रंगमती हिल्स जिले की महत्वपूर्ण सीट से शानदार जीत हासिल की है। दीपेन दीवान को चकमा अल्पसंख्यक समुदाय की बुलंद आवाज माना जाता है। पहाड़ी क्षेत्रों में उनकी गहरी पैठ को देखते हुए उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल करना बीएनपी की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है, ताकि इन क्षेत्रों के विकास और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।

13वें संसदीय चुनाव में अल्पसंख्यक उम्मीदवारों की धमक

इस बार के चुनावों में अल्पसंख्यक समुदाय का प्रदर्शन काफी प्रभावशाली रहा है। कुल 4 अल्पसंख्यक उम्मीदवार बीएनपी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं। इनमें दो हिंदू नेता— गायेश्वर चंद्र रॉय और निताई रॉय चौधरी तथा दो बौद्ध नेता— सचिन प्रू और दिपेन दीवान चकमा शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निताई रॉय और दिपेन दीवान को मंत्री बनाकर तारिक सरकार ने अल्पसंख्यकों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को यह कड़ा संदेश दिया है कि नई सरकार में सभी धर्मों और समुदायों का सम्मान सुरक्षित है।

सांप्रदायिक सद्भाव और लोकतंत्र की बहाली का संकल्प

शपथ लेने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता देश में पूर्ण लोकतंत्र की बहाली और सांप्रदायिक सद्भाव को बनाए रखना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि बांग्लादेश अब एक ऐसी दिशा में बढ़ेगा जहां किसी भी नागरिक को उसके धर्म या पहचान के आधार पर असुरक्षित महसूस नहीं करना पड़ेगा।