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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से बड़ी अंतरिम राहत मिली है। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों में घिरे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके सहयोगी मुकुंदानंद की गिरफ्तारी पर अदालत ने अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति जे.के. सिन्हा की पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ जारी रख सकेंगी और उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा।

चैंबर में हुई सुनवाई: भारी हंगामे के चलते कोर्ट ने लिया फैसला

प्रयागराज की इस हाई-प्रोफाइल सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में भारी भीड़ और समर्थकों के हंगामे की स्थिति बन गई थी। सुरक्षा और शांति बनाए रखने के लिए कोर्ट ने खुली अदालत के बजाय न्यायाधीश के चैंबर में सुनवाई करने का निर्णय लिया। सुनवाई के दौरान केवल संबंधित वकीलों को ही अंदर जाने की अनुमति दी गई। कोर्ट ने बचाव पक्ष से यह सवाल भी किया कि उन्होंने सीधे उच्च न्यायालय का रुख क्यों किया और पहले सत्र न्यायालय (Sessions Court) में अग्रिम जमानत की अर्जी क्यों नहीं लगाई।

सरकार की तीखी आपत्ति: 'साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं आरोपी'

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त महाधिवक्ता मनीष गोयल ने अग्रिम जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। सरकार का तर्क था कि यह मामला सीधे तौर पर कोर्ट के आदेश पर दर्ज एफआईआर से जुड़ा है और इसकी जांच वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। अभियोजन पक्ष ने आशंका जताई कि यदि आरोपियों को खुली राहत दी गई, तो वे पीड़ितों और गवाहों को डरा-धमका सकते हैं या साक्ष्यों को नष्ट कर सकते हैं। सरकार ने कोर्ट को बताया कि पीड़ितों के बयान दर्ज कर लिए गए हैं और जांच प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

बचाव पक्ष का पलटवार: शिकायतकर्ता के आपराधिक इतिहास पर उठाए सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दिलीप गुप्ता ने दलील दी कि उनके मुवक्किल जांच में सहयोग के लिए पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने शिकायतकर्ता आशुतोष पांडे उर्फ आशुतोष ब्रह्मचारी की पृष्ठभूमि पर सवाल उठाते हुए उसे आपराधिक इतिहास वाला व्यक्ति बताया। बचाव पक्ष ने यह भी दावा किया कि जिस पीड़ित को नाबालिग बताया जा रहा है, वह मार्कशीट के अनुसार बालिग है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े आशुतोष ब्रह्मचारी के टोकने और व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जाहिर की और उन्हें फटकार भी लगाई।

अगली सुनवाई मार्च के तीसरे हफ्ते में, तब तक गिरफ्तारी नहीं

हाईकोर्ट ने सरकारी वकील से पूछा कि कथित पीड़ित बच्चे वर्तमान में कहां हैं और उनकी सुरक्षा के क्या इंतजाम किए गए हैं। कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मार्च के तीसरे सप्ताह तक स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की गिरफ्तारी नहीं हो सकेगी। विस्तृत आदेश शाम तक वेबसाइट पर अपलोड होने की उम्मीद है, जिसमें शर्तों का उल्लेख होगा। यह मामला कुंभ और माघ मेले के दौरान हुए कथित यौन शोषण से जुड़ा है, जिसकी एफआईआर ने संतों के बीच हड़कंप मचा दिया था।