अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी समेत 3 विधायकों ने की थी गद्दारी, आज देखिए उनका क्या हाल है: तेजस्वी यादव

अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी समेत 3 विधायकों ने की थी गद्दारी, आज देखिए उनका क्या हाल है: तेजस्वी यादव

बिहार की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक बयानबाजी का पारा एक बार फिर अपने चरम पर पहुँच गया है, जहाँ राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के युवा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने अपनी ही पार्टी और महागठबंधन के खिलाफ बगावत करने वाले पूर्व विधायकों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। एक विशाल जनसभा और चुनावी रैली को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने मोकामा से पूर्व बाहुबली विधायक अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी का विशेष रूप से नाम लेते हुए कहा कि जिन तीन विधायकों ने व्यक्तिगत स्वार्थ और राजनीतिक सौदेबाजी के चक्कर में पार्टी के साथ गद्दारी की थी, आज उनकी राजनीतिक स्थिति पूरी तरह से हास्यपद और दयनीय हो चुकी है। तेजस्वी ने भरी सभा में जनता को संबोधित करते हुए कहा कि जब फ्लोर टेस्ट और राजनीतिक संकट का समय आया था, तब इन विधायकों ने अपने जनादेश, विचारधारा और कार्यकर्ताओं के खून-पसीने को दरकिनार कर सत्ता के पाले में जाने का फैसला किया था, लेकिन आज वही नेता अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के आक्रोश और राजनीतिक उपेक्षा का सामना करने को मजबूर हैं।

नीलम देवी और अन्य बागी विधायकों की राजनीतिक यात्रा का काला पन्ना: जानिए क्यों और कैसे शुरू हुई थी राजद में बगावत?

बिहार विधानसभा के पटल पर हुए बहुमत परीक्षण (Floor Test) के दौरान जब सत्ता का समीकरण बेहद दिलचस्प मोड़ पर था, तब राजद के टिकट पर चुनाव जीतकर आए विधायकों में से नीलम देवी, चेतन आनंद और प्रह्लाद यादव जैसे नेताओं ने पाला बदलकर सत्ताधारी दल का दामन थाम लिया था। तेजस्वी यादव ने इस घटनाक्रम को याद दिलाते हुए कहा कि मोकामा की सम्मानित जनता ने अनंत सिंह और नीलम देवी पर भरोसा जताकर उन्हें राष्ट्रीय जनता दल के सिंबल पर भारी बहुमत से जिताया था, लेकिन उन्होंने सत्ता के दबाव या अपने निजी फायदों के चलते उस भरोसे की धज्जियां उड़ा दीं। तेजस्वी ने भावुक और कड़े लहजे में कहा कि जब इंसान अपनी मूल विचारधारा और अपने समर्थकों के साथ धोखा करता है, तो जनता का अदालत में उनका हिसाब होना तय हो जाता है। आज इन बागी नेताओं के पास न तो अपनी पुरानी पार्टी का समर्थन बचा है और न ही नए गठबंधन में उन्हें वह सम्मान और जगह मिल पा रही है जिसकी उम्मीद में उन्होंने बगावत का झंडा बुलंद किया था।

'जनता की अदालत सबसे बड़ी, धोखेबाजों को कभी माफ नहीं करेगी बिहार की आवाम': तेजस्वी यादव ने कार्यकर्ताओं में भरा जोश

अपने संबोधन के दौरान तेजस्वी यादव ने आगामी विधानसभा चुनावों और उपचुनावों के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं का आह्वान करते हुए कहा कि बिहार की समझदार जनता कभी भी गद्दारी और धोखेबाजी की राजनीति को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने दावा किया कि जिन नेताओं ने पाला बदला था, आज उनके अपने विधानसभा क्षेत्रों में जनता उनसे जवाब मांग रही है और जब भी चुनाव का मौका आएगा, जनता अपने वोट की ताकत से इन सभी बागी नेताओं को करारा जवाब देगी। तेजस्वी ने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल केवल एक पार्टी नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और गरीब-शोषित वर्ग की आवाज है, और जो लोग इस विचारधारा को छोड़कर गए हैं, वे अब केवल राजनीतिक रूप से हाशिए पर खड़े नजर आ रहे हैं। इस जनसभा में उमड़ी भारी भीड़ ने तेजस्वी यादव के बयानों का जोरदार तालियों और नारों के साथ समर्थन किया, जिससे स्पष्ट हो गया कि बिहार की भावी राजनीति में यह बगावत का मुद्दा काफी लंबा खींचने वाला है।

बिहार की सियासत पर इस बयान के दूरगामी राजनीतिक मायने: क्या सत्ताधारी खेमे में मचेगी खलबली?

तेजस्वी यादव द्वारा नीलम देवी, चेतन आनंद और अन्य बागी नेताओं पर किए गए इस सीधे और तीखे हमले के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेजस्वी का यह बयान केवल एक पुरानी बगावत का जिक्र नहीं है, बल्कि यह आगामी चुनावों के लिए एक बड़ी रणनीतिक घेराबंदी है, ताकि पाला बदलने वाले नेताओं की जनसमर्थन और विश्वसनीयता को जनता के बीच पूरी तरह से शून्य किया जा सके। बागी विधायकों के अपने-अपने क्षेत्रों में बन रहे नए राजनीतिक समीकरणों और जनता के रुख को देखते हुए यह माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव का यह राजनीतिक दांव जनता के बीच काफी गहरा असर छोड़ेगा। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि नीलम देवी या सत्ताधारी गठबंधन की ओर से तेजस्वी यादव के इस तीखे और चुभते हुए हमले का क्या पलटवार सामने आता है।