बंगाल की खाड़ी में आ रहा खतरनाक तूफान, बिहार के इन जिलों में होगी भारी बारिश, मौसम विभाग ने किया अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में आ रहा खतरनाक तूफान, बिहार के इन जिलों में होगी भारी बारिश, मौसम विभाग ने किया अलर्ट

देश के पूर्वी हिस्सों में मौसम का मिजाज एक बार फिर बेहद खतरनाक और चिंताजनक मोड़ पर पहुंच गया है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्वी और मध्य भागों में पिछले कुछ दिनों से लगातार सक्रिय बने कम दबाव के क्षेत्र ने अब एक भीषण चक्रवाती तूफान का रूप ले लिया है। इस शक्तिशाली मौसमी प्रणाली के उत्तर-पश्चिम दिशा की ओर तेजी से बढ़ने के कारण झारखंड और पश्चिम बंगाल के रास्ते इसका सीधा प्रभाव अब बिहार के आसमान पर भी साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। मौसम विज्ञान केंद्र (IMD Patna) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, इस चक्रवाती तूफान के नमीयुक्त बादलों और तेज हवाओं ने बिहार के मौसम चक्र को पूरी तरह से उलट दिया है। राज्य के कई दक्षिणी और पूर्वी जिलों में आसमान में घने काले बादलों का डेरा जम चुका है और मौसम विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि अगले 48 से 72 घंटों के दौरान बिहार के कई हिस्सों में झमाझम मूसलाधार बारिश के साथ-साथ बादलों की भयंकर गड़गड़ाहट और वज्रपात (Thunderstorm & Lightning) का तांडव देखने को मिलेगा, जिसके लिए प्रशासन ने कमर कस ली है।

बिहार के इन जिलों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा: जानिए कहां-कहां होगी सबसे भारी बारिश और आंधी का प्रकोप

मौसम विभाग द्वारा जारी ताजा अपडेट्स के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी से उठने वाले इस तूफान का सबसे ज्यादा और गंभीर असर बिहार के सीमांचल, कोसी और दक्षिण-पूर्वी जिलों पर पड़ने वाला है। भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर, खगड़िया, कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज, औरंगाबाद, गया, नवादा और रोहतास समेत दर्जनों जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की प्रबल संभावना जताई गई है। इन जिलों के लिए मौसम विभाग ने विशेष रूप से ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। किसानों के लिए यह बेमौसम बारिश किसी बड़ी आफत से कम नहीं है, क्योंकि खेतों में धान की पकी हुई फसल और मक्का तथा सब्जियों की खेती इस मूसलाधार पानी और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं के कारण बर्बाद हो सकती है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दें ताकि नुकसान को कम किया जा सके।

50 KMPH की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं और गिरेगी आफत की बिजली: आम नागरिकों के लिए कड़े सुरक्षा निर्देश

चक्रवाती तूफान के इस अप्रत्याशित प्रभाव के चलते केवल भारी बारिश ही नहीं, बल्कि हवाओं की रफ्तार भी लोगों की मुश्किलें बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। प्रभावित क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे (50 KMPH) की गति से हवाएं चलने की भविष्यवाणी की गई है, जो कमजोर कच्चे मकानों, टीन-शेड, होर्डिंग्स और बिजली के पुराने तारों व ट्रांसफॉर्मर को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा, बादलों की गरज के साथ लगातार होने वाली आसमानी बिजली (Vajrapat) ग्रामीण इलाकों में सबसे बड़ा खतरा बन गई है। आपदा प्रबंधन विभाग (Disaster Management Authority) ने राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे वज्रपात से बचाव के लिए अर्ली वार्निंग सिस्टम और सायरन का पूरा इस्तेमाल करें। लोगों से बार-बार अपील की जा रही है कि वे खराब मौसम के दौरान पेड़ों के नीचे बिल्कुल शरण न लें और खेतों या खुले मैदानों में जाने से पूरी तरह बचें।

त्योहारी सीजन और छठ पर्व की तैयारियों के बीच मौसम की मार: जिला प्रशासन और आपदा राहत टीमें पूरी तरह मुस्तैद

दिवाली और महापर्व छठ की तैयारियों के बीच मौसम के इस अचानक बिगड़े मिजाज ने आम जनता और प्रशासनिक अधिकारियों की धड़कनें तेज कर दी हैं। बाजारों में खरीदारी करने वाले लोगों को बारिश और जलभराव के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए एनडीआरएफ (NDRF) और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को संवेदनशील जिलों में तैनात कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इस चक्रवाती सिस्टम का असर अगले तीन दिनों तक बना रहेगा और उसके बाद धीरे-धीरे आसमान साफ होना शुरू हो जाएगा। तब तक प्रशासन की यही सलाह है कि लोग पूरी तरह सतर्क रहें, मौसम के ताजा अपडेट्स पर नजर बनाए रखें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देकर केवल आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।