फिल्म 'रामायण' के गानों को लेकर क्यों ट्रोल हुए संगीत सम्राट एआर रहमान? जानिए पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी

फिल्म 'रामायण' के गानों को लेकर क्यों ट्रोल हुए संगीत सम्राट एआर रहमान? जानिए पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी

नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही भारतीय सिनेमा की सबसे भव्य और महत्वाकांक्षी फिल्म 'रामायण' (Ramayana) को लेकर दर्शकों के बीच भारी उत्साह है। लेकिन हाल ही में जब फिल्म के शुरुआती संगीत और गानों की झलक सोशल मीडिया पर सामने आई, तो संगीत की दुनिया के ऑस्कर विजेता उस्ताद एआर रहमान (A.R. Rahman) को भारी आलोचना और ऑनलाइन ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा। कई फैंस और संगीत प्रेमियों ने आरोप लगाया कि फिल्म के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्तर के हिसाब से संगीत में वह पारंपरिक गहराई और रूहानियत देखने को नहीं मिली, जिसकी उम्मीद एआर रहमान जैसे लीजेंड से की जाती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर देखते ही देखते उनके खिलाफ प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई और लोगों ने उनके संगीत संयोजन पर सवाल उठाने शुरू कर दिए। इतने बड़े स्तर पर हो रही आलोचना के बाद हर किसी की नजरें इस बात पर टिकी थीं कि आखिर एआर रहमान इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं।

ट्रोलिंग और आलोचनाओं पर एआर रहमान का दोटूक जवाब: 'काम खत्म करने के बाद मुझमें फीडबैक देखने की एनर्जी नहीं बचती'

लंबे समय तक इस मुद्दे पर खामोश रहने के बाद आखिरकार एआर रहमान ने एक हालिया इंटरव्यू के दौरान अपनी चुप्पी तोड़ी है और ट्रोलर्स को अपनी ही बेबाक शैली में जवाब दिया है। जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया पर 'रामायण' के संगीत को लेकर हो रही तीखी आलोचनाओं को वे किस तरह देखते हैं, तो रहमान ने मुस्कुराते हुए कहा कि वे जब किसी प्रोजेक्ट पर काम करते हैं, तो उसमें अपनी पूरी आत्मा, मेहनत और समर्पण झोंक देते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिनभर स्टूडियो में लगातार कई घंटों तक काम करने और धुनों को तराशने के बाद उनके शरीर और दिमाग में इतनी ऊर्जा ही नहीं बचती कि वे इंटरनेट पर जाकर लोगों के कमेंट्स या नेगेटिव फीडबैक पढ़ें। रहमान ने कहा कि वे अपना काम पूरी ईमानदारी के साथ करते हैं और परिणाम को जनता तथा समय के हवाले छोड़ देते हैं, क्योंकि हर इंसान का नजरिया अलग होता है।

रामायण जैसे पौराणिक महाकाव्य के लिए संगीत तैयार करना कितनी बड़ी चुनौती?

एआर रहमान ने आगे बात करते हुए इस बात को स्वीकार किया कि 'रामायण' जैसे भारत के सबसे पवित्र और महान ग्रंथ पर आधारित फिल्म के लिए संगीत तैयार करना उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और संवेदनशील काम रहा है। उन्होंने बताया कि इस तरह की पौराणिक और कालजयी रचनाओं का संगीत बनाते समय केवल धुनों का सुरीला होना ही काफी नहीं होता, बल्कि उसके पीछे की भावना, भक्ति, सांस्कृतिक विरासत और मर्यादा का भी विशेष ध्यान रखना पड़ता है। रहमान ने यह भी संकेत दिया कि जो संगीत अभी सामने आया है, वह पूरी पिक्चर का केवल एक छोटा सा हिस्सा है। जब पूरी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होगी और दर्शक दृश्यों के साथ गानों के सामंजस्य को देखेंगे, तो उनका नजरिया पूरी तरह से बदल जाएगा और वे इस संगीत के पीछे की मेहनत को समझ पाएंगे।

फैंस का मिला समर्थन: महान कलाकारों का काम समय की कसौटी पर ही खरा उतरता है

एआर रहमान के इस बेबाक और परिपक्व बयान के सामने आने के बाद उनके लाखों समर्थकों और संगीत प्रेमियों ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है। उनके प्रशंसकों का कहना है कि एआर रहमान ने हमेशा से ही भारतीय संगीत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया है और उनकी धुनों को समझने में अक्सर लोगों को थोड़ा समय लगता है। 'रोजा', 'बॉम्बे', 'दिल से' से लेकर 'लगाना' और 'स्लमडॉग मिलेनियर' तक, रहमान के गानों ने हमेशा समय के साथ अपनी चमक बढ़ाई है। फिल्म 'रामायण' के निर्माताओं को भी पूरा भरोसा है कि जब यह सिनेमाई उत्कृष्ट कृति पर्दे पर आएगी, तो एआर रहमान का दिया संगीत भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होगा