Prabhat Vaibhav,Digital Desk : आज के दौर में हेडफोन और ईयरफोन हमारी जीवनशैली का अनिवार्य हिस्सा बन गए हैं। सफर हो या ऑफिस का काम, लोग घंटों कानों में ईयरफोन लगाए रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत आपको हमेशा के लिए खामोशी की दुनिया में धकेल सकती है? 17 फरवरी 2026 को आई स्वास्थ्य रिपोर्ट और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर के करीब एक अरब युवा अपनी असुरक्षित सुनने की आदतों के कारण बहरेपन की कगार पर हैं।
कैसे काम करता है 'धीमा जहर': विज्ञान की नजर से
मणिपाल अस्पताल की एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, हमारे कान के भीतर एक नाजुक प्रणाली होती है। जब हम ईयरफोन पर तेज आवाज सुनते हैं, तो ध्वनि तरंगें कान के पर्दे में कंपन पैदा करती हैं। ये कंपन भीतरी कान के 'कॉक्लिया' (Cochlea) तक पहुँचते हैं, जिसमें हजारों नन्हीं बालनुमा कोशिकाएं होती हैं।
कोशिकाओं का डैमेज होना: लगातार और तेज आवाज इन नाजुक कोशिकाओं पर अत्यधिक दबाव डालती है।
स्थायी नुकसान: लंबे समय तक ऐसा होने पर ये कोशिकाएं अपनी संवेदनशीलता खो देती हैं या पूरी तरह नष्ट हो जाती हैं। एक बार ये कोशिकाएं मर जाएं, तो इन्हें दोबारा जीवित नहीं किया जा सकता, जिससे 'शोर-प्रेरित श्रवण हानि' (Noise-induced Hearing Loss) हो जाती है।
कान बजना और इन्फेक्शन: केवल बहरापन ही नहीं है खतरा
हेडफोन का अत्यधिक उपयोग केवल सुनने की शक्ति ही कम नहीं करता, बल्कि कई अन्य समस्याओं को भी जन्म देता है:
टिनिटस (Tinnitus): कान में लगातार सीटी जैसी या घंटी बजने जैसी आवाज सुनाई देना।
हाइपरएक्यूसिस: सामान्य आवाज का भी कानों को असहनीय लगना।
संक्रमण और बैक्टीरिया: ईयरफोन को कहीं भी रख देने या दूसरों के साथ साझा करने से बैक्टीरिया जमा हो जाते हैं, जिससे कान में बार-बार इन्फेक्शन और दर्द की समस्या होती है।
ईयर वैक्स और चक्कर: कानों में हवा का संचार रुकने से मैल (Wax) अधिक जमा होने लगता है, जिससे सुनने में रुकावट और चक्कर आने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
बचाव के उपाय: कानों को कैसे रखें सुरक्षित?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कानों की सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी दिशा-निर्देश साझा किए हैं:
60/60 का नियम: वॉल्यूम को हमेशा 60% से कम रखें और दिन में 60 मिनट से ज्यादा हेडफोन का इस्तेमाल न करें।
सही हेडफोन का चुनाव: ईयरफोन की जगह 'ओवर-द-ईयर' (Over-the-ear) या 'नॉइज-कैंसलिंग' हेडफोन का इस्तेमाल करें। ये बाहरी शोर को रोकते हैं, जिससे आपको आवाज तेज करने की जरूरत नहीं पड़ती।
सफाई है जरूरी: अपने ईयरफोन को नियमित रूप से सैनिटाइज करें और इन्हें किसी के साथ साझा न करें।
ब्रेक लें: हर आधे घंटे के इस्तेमाल के बाद कानों को कम से कम 10 मिनट का आराम दें।




