Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों और हिंसा के मामलों में न्यायपालिका ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। जनवरी में हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस अधिकारियों की हत्या के दोषी पाए गए तीन लोगों को फांसी की सजा दे दी गई है। ईरानी मीडिया और आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, इन व्यक्तियों पर सुरक्षा बलों पर जानलेवा हमला करने और देश की शांति व्यवस्था को भंग करने के गंभीर आरोप थे। इस कार्रवाई के बाद मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के बीच एक बार फिर बहस छिड़ गई है, जबकि ईरान ने इसे अपनी आंतरिक सुरक्षा और कानून के शासन को बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बताया है।
सुरक्षा बलों पर हमले और हत्या का था संगीन आरोप
ईरान की एक विशेष अदालत में चली सुनवाई के दौरान इन तीनों आरोपियों को सुरक्षा अधिकारियों की हत्या का मुख्य साजिशकर्ता माना गया। सरकारी अभियोजकों ने अदालत में साक्ष्य पेश करते हुए दावा किया कि जनवरी के प्रदर्शनों के दौरान इन लोगों ने हथियारों का इस्तेमाल कर पुलिस की टुकड़ियों पर हमला किया था, जिसमें कई अधिकारियों की जान चली गई थी। कोर्ट ने इसे 'अल्लाह के खिलाफ जंग' (मोहरेबेह) और देश के विरुद्ध साजिश करार देते हुए मृत्युदंड की सजा मुकर्रर की थी। सजा के क्रियान्वयन से पहले अपीलीय अदालत में भी इनकी याचिका खारिज कर दी गई थी, जिसके बाद अंततः फांसी की प्रक्रिया पूरी की गई।
जनवरी के विरोध प्रदर्शनों ने हिला दिया था तेहरान
बता दें कि इसी साल जनवरी में ईरान के कई प्रमुख शहरों में महंगाई, बेरोजगारी और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए थे। धीरे-धीरे इन प्रदर्शनों ने हिंसक रूप अख्तियार कर लिया था, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़पें हुई थीं। ईरान सरकार का आरोप है कि इन प्रदर्शनों को विदेशी ताकतों द्वारा हवा दी जा रही थी ताकि देश में अस्थिरता पैदा की जा सके। इस दौरान दर्जनों पुलिसकर्मियों के घायल होने और कुछ की मौत की खबरें सामने आई थीं। प्रशासन ने तब से ही हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों की पहचान कर उन पर कानूनी शिकंजा कसना शुरू कर दिया था।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और ईरान का कड़ा रुख
इन फांसियों के बाद एमनेस्टी इंटरनेशनल और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद ने चिंता व्यक्त की है। कई पश्चिमी देशों ने ईरान से मृत्युदंड पर रोक लगाने की अपील की थी, लेकिन तेहरान ने इन अपीलों को खारिज करते हुए इसे अपना संप्रभु अधिकार बताया है। ईरानी अधिकारियों का तर्क है कि जो लोग कानून हाथ में लेते हैं और सुरक्षाकर्मियों की जान लेते हैं, उन्हें किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। इस घटनाक्रम के बाद ईरान के भीतर भी तनावपूर्ण शांति देखी जा रही है और प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दिया गया है ताकि किसी भी संभावित विरोध प्रदर्शन को रोका जा सके।
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