Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण युद्ध के बीच एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा हुआ है जिसने पूरी दुनिया के सुरक्षा विशेषज्ञों को हैरत में डाल दिया है। ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों के मलबे की फॉरेंसिक जांच में रूसी तकनीक और विशेषज्ञों के सीधे शामिल होने के सबूत मिले हैं। इस खुलासे के बाद अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान की सैन्य ताकत के पीछे रूस का हाथ है? वहीं दूसरी ओर, इस युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल के बीच भारत ने भी अपनी रणनीति बदलते हुए रूस से तेल आयात में भारी वृद्धि कर दी है।
ईरानी मिसाइलों में रूसी 'दिमाग' का इस्तेमाल!
ईरान और इजरायल के बीच चल रहे हवाई हमलों के बीच, विशेषज्ञों ने ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों के मलबे का बारीकी से परीक्षण किया। जांच में पाया गया कि मिसाइलों की उत्पादन प्रक्रिया और उनकी गाइडेड तकनीक में सोवियत युग और आधुनिक रूसी विशेषज्ञों की गहरी छाप है। यह संकेत देता है कि ईरान ने इन हथियारों को अकेले विकसित नहीं किया, बल्कि उसे रूस से महत्वपूर्ण तकनीकी सहायता मिली है। अब अमेरिका और इजरायल इस 'रूसी-ईरानी' गठजोड़ को लेकर और भी सतर्क हो गए हैं।
युद्ध के साये में भारत का 'मिशन रशियन ऑयल'
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल आपूर्ति को खतरे में डाल दिया है। ऐसे में भारत ने दूरदर्शिता दिखाते हुए अपने आयात स्रोतों में बड़ा बदलाव किया है। आंकड़ों के अनुसार:
भारी बढ़ोत्तरी: मार्च 2026 में भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की है।
आंकड़ों का गणित: फरवरी में जहां भारत लगभग 1,40,000 बैरल प्रति दिन तेल ले रहा था, वहीं मार्च में यह बढ़कर 15 लाख बैरल तक पहुंच गया है।
निर्भरता: भारत अपनी तेल जरूरतों का 88% आयात करता है। लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते खतरे को देखते हुए रूसी तेल भारत के लिए एक सुरक्षित और सस्ता विकल्प बनकर उभरा है।
ट्रंप की दहाड़: "जब मैं चाहूँगा, तभी रुकेगा यह युद्ध"
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने आक्रामक बयानों से पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। ट्रंप ने एक हालिया बातचीत में दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता अब लगभग खत्म हो चुकी है और वहां अब निशाना बनाने के लिए कुछ खास नहीं बचा है। उन्होंने दो टूक कहा, "यह युद्ध तब समाप्त होगा जब मैं चाहूँगा।" हालांकि, जमीनी हकीकत ट्रंप के दावों से अलग है, क्योंकि इजरायल और अमेरिका के साझा हमले अभी भी रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं।
लक्ष्य प्राप्ति तक जारी रहेगा इजरायली सैन्य अभियान
इजरायल की सेना ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ मिलकर चलाया जा रहा यह मिशन किसी समय सीमा में नहीं बंधा है। इजरायल का कहना है कि जब तक उनके सभी सामरिक लक्ष्य पूरे नहीं हो जाते और क्षेत्र से खतरे का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता, तब तक उनके हमले जारी रहेंगे। इस 'नो टाइम लिमिट' वाले अभियान ने क्षेत्र में लंबे समय तक अस्थिरता रहने की आशंका बढ़ा दी है।




