Prabhat Vaibhav,Digital Desk : उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों की संख्या को लेकर सामने आए आंकड़ों ने न सिर्फ प्रशासन बल्कि न्यायपालिका को भी झकझोर कर रख दिया है। बीते दो वर्षों में प्रदेश से एक लाख आठ हजार से अधिक लोग लापता हुए हैं, जिनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट पुलिस में दर्ज है। इनमें से महज 9700 लोगों का ही अब तक पता चल सका है। इस गंभीर स्थिति को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने बेहद चिंताजनक मानते हुए स्वतः संज्ञान लिया है।
हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने इस मामले में राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब करते हुए पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्णा और अपर मुख्य सचिव गृह (ACS Home) संजय प्रसाद को 23 मार्च को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया है। कोर्ट ने निर्देश दिया है कि उस दिन प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों से जुड़े सभी आंकड़े और रिकॉर्ड अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएं।
स्वतः संज्ञान लेकर दर्ज की गई जनहित याचिका
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति एके चौधरी की खंडपीठ ने इस मामले को प्रदेश स्तर का गंभीर सामाजिक मुद्दा मानते हुए इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया है। अदालत ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का लापता होना कानून-व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
एक याचिका से खुला बड़ा मामला
यह मामला तब सामने आया जब लखनऊ के चिनहट क्षेत्र के एक व्यक्ति ने अपने बेटे के लापता होने को लेकर याचिका दाखिल की। याची ने बताया कि उसका बेटा जुलाई 2024 से लापता है और थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसी सुनवाई के दौरान प्रदेशभर के गुमशुदा लोगों से जुड़े आंकड़े अदालत के सामने आए।
सरकार के हलफनामे में चौंकाने वाला खुलासा
अदालत के आदेश पर अपर मुख्य सचिव गृह की ओर से दाखिल हलफनामे में बताया गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच कुल 1,08,300 लोग लापता हुए, जिनमें से केवल 9700 को ही खोजा जा सका। इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह स्थिति दर्शाती है कि गुमशुदा लोगों के मामलों में संबंधित अधिकारियों का रवैया बेहद लापरवाह रहा है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
हाई कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि यह केवल आंकड़ों का मामला नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के भविष्य और उनकी पीड़ा से जुड़ा गंभीर सवाल है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि अगली सुनवाई में जिम्मेदार अधिकारियों से कड़े सवाल पूछे जा सकते हैं।




