Prabhat Vaibhav,Digital Desk : ईरान के साथ जारी भीषण युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घरेलू राजनीति में एक बहुत बड़ा 'वीटो' दांव चल दिया है। रविवार, 8 मार्च 2026 को व्हाइट हाउस से जारी एक बयान में ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अब किसी भी नए बिल या कानून पर तब तक हस्ताक्षर नहीं करेंगे, जब तक कि संसद बहुचर्चित 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE America Act) को पारित नहीं कर देती। युद्ध जैसी आपातकालीन स्थिति में राष्ट्रपति के इस अड़ियल रुख ने वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक सनसनी फैला दी है।
सोशल मीडिया पर चेतावनी: "88% जनता हमारे साथ"
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक लंबी पोस्ट साझा करते हुए इसे 'राष्ट्रीय अस्मिता' का मुद्दा बताया है। उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता स्कॉट प्रेसलर के अभियान की तारीफ करते हुए दावा किया कि अमेरिका के 88 प्रतिशत मतदाता चुनाव सुधारों के इस नए कानून का समर्थन कर रहे हैं। ट्रंप ने साफ कहा कि देश बाहरी दुश्मनों से लड़ रहा है, लेकिन भीतर की चुनावी व्यवस्था को सुरक्षित करना उनकी पहली प्राथमिकता है।
क्या है 'सेव अमेरिका एक्ट' और ट्रंप क्यों हैं इस पर अड़े?
यह कानून अमेरिका की मौजूदा मतदान प्रक्रिया में आमूलचूल बदलाव की वकालत करता है। इसके तहत तीन प्रमुख बदलाव प्रस्तावित हैं:
नागरिकता का प्रमाण: वोट डालने के लिए केवल आईडी कार्ड काफी नहीं होगा, बल्कि अमेरिकी नागरिक होने का वैध आधिकारिक दस्तावेज दिखाना अनिवार्य होगा।
पोस्टल बैलेट पर पाबंदी: डाक द्वारा मतदान (Mail-in Voting) पर पूरी तरह रोक लगाने का प्रस्ताव है।
विशेष छूट: केवल सेना के जवान, गंभीर बीमार, दिव्यांग या विदेश में कार्यरत लोगों को ही डाक से वोट देने की अनुमति मिलेगी।
संसद में फंसा पेंच: निचले सदन में पास, सीनेट में विरोध
'सेव अमेरिका एक्ट' को लेकर अमेरिकी राजनीति दो धड़ों में बंट गई है। रिपब्लिकन नियंत्रित निचले सदन (House of Representatives) में यह बिल तीन बार पास हो चुका है, लेकिन ऊपरी सदन (Senate) में विपक्षी दल इसे रोकने में सफल रहे हैं। विरोधियों का तर्क है कि यह कानून गरीब और अल्पसंख्यक मतदाताओं को वोटिंग प्रक्रिया से दूर करने की एक साजिश है। हालांकि, ट्रंप का तर्क है कि बिना कड़े नियमों के चुनाव में 'विदेशी दखल' और 'अवैध मतदान' को रोकना असंभव है।
युद्ध के बीच 'इंटरनल सिक्योरिटी' का दांव
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के साथ चल रहे युद्ध के दौरान ट्रंप इस कानून को पास कराकर अपनी चुनावी जमीन को पूरी तरह सुरक्षित कर लेना चाहते हैं। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनके लिए अन्य सभी विधेयक—चाहे वे रक्षा बजट से जुड़े हों या राहत पैकेज से—'सेव अमेरिका एक्ट' के बाद ही आएंगे। राष्ट्रपति के इस फैसले से आने वाले दिनों में अमेरिकी संसद और व्हाइट हाउस के बीच एक बड़ा गतिरोध पैदा होना तय माना जा रहा है।




