Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया में जारी भीषण संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे खौफनाक चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर ईरान ने वैश्विक तेल आपूर्ति में बाधा डालने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर अब तक का सबसे बड़ा प्रहार करेगा। राष्ट्रपति ने दो-टूक लहजे में कहा कि यह हमला पहले की तुलना में 20 गुना अधिक विनाशकारी होगा, जिससे ईरान एक राष्ट्र के रूप में कभी संभल नहीं पाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना 'फ्लैशपॉइंट', दुनिया पर ऊर्जा संकट का साया
ईरान और अमेरिका-इजराइल गठबंधन के बीच जारी युद्ध अब दूसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। तनाव तब चरम पर पहुंच गया जब ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों को रोकना शुरू कर दिया। बता दें कि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग है। ईरान की इस नाकाबंदी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है, जिससे अमेरिका समेत पूरी दुनिया में हाहाकार मचा है।
'सिर्फ मौत, आग और क्रोध होगा': ट्रंप का सोशल मीडिया पर कड़ा प्रहार
हमेशा की तरह अपने आक्रामक अंदाज में डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर ईरान को आगाह किया। ट्रंप ने लिखा, "अगर ईरान तेल प्रवाह को रोकने का कोई भी दुस्साहस करता है, तो अमेरिका इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। हम ऐसी जवाबी कार्रवाई करेंगे कि वहां सिर्फ मौत, आग और क्रोध दिखाई देगा।" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि वह उम्मीद करते हैं कि मानवता के नाते ऐसी नौबत न आए, लेकिन अमेरिकी हितों और वैश्विक अर्थव्यवस्था की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं।
दूसरे हफ्ते में पहुंचा भीषण युद्ध, इजराइल-अमेरिका की संयुक्त कार्रवाई
यह संघर्ष 28 फरवरी 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजराइल ने संयुक्त रूप से ईरान पर सैन्य हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इस युद्ध ने न केवल मध्य पूर्व की शांति भंग की है, बल्कि भारत जैसे देशों में भी रसोई गैस (LPG) और ईंधन की भारी किल्लत पैदा कर दी है। ट्रंप पर अब घरेलू स्तर पर भी तेल की कीमतें कम करने का भारी दबाव है।
क्या ईरान सह पाएगा अमेरिका का अगला वार?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह '20 गुना बड़े हमले' वाली धमकी केवल मनोवैज्ञानिक युद्ध नहीं है। अमेरिका पहले ही खाड़ी में अपनी नौसैनिक शक्ति बढ़ा चुका है। यदि ईरान ने होर्मुज की नाकाबंदी जारी रखी, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था को बचाने के नाम पर अमेरिका ईरान के तेल इंफ्रास्ट्रक्चर को पूरी तरह तबाह कर सकता है। फिलहाल पूरी दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं।




