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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पिछले 24 दिनों से मिडिल ईस्ट में जारी भीषण रक्तपात के बीच शांति की एक धुंधली उम्मीद जागी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए दुनिया को बताया है कि पर्दे के पीछे तीन प्रमुख मुस्लिम देश— तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान — अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता की मेज पर आ गए हैं। इस कूटनीतिक हलचल का बड़ा असर यह हुआ है कि ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर होने वाले बड़े हमले को अगले 5 दिनों के लिए टाल दिया है।

शांति दूतों की सक्रियता: स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर मिशन पर

अमेरिकी समाचार वेबसाइट 'एक्सियोस' की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले 48 घंटों से तुर्की, मिस्र और पाकिस्तान के प्रतिनिधि वाशिंगटन और तेहरान के बीच 'मैसेंजर' की भूमिका निभा रहे हैं। ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने इन देशों के प्रतिनिधियों के जरिए ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से संपर्क साधा है। व्हाइट हाउस में हुई गुप्त बैठकों के बाद ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि बातचीत "सकारात्मक और सार्थक" दिशा में बढ़ रही है, जिससे युद्धविराम की संभावनाएं प्रबल हुई हैं।

ट्रंप का यू-टर्न? 5 दिनों तक थमी रहेंगी मिसाइलें

अपने आक्रामक तेवरों के लिए मशहूर डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट के जरिए दुनिया को हैरान कर दिया। उन्होंने लिखा कि ईरान के साथ चर्चा सकारात्मक रही है, जिसके चलते उन्होंने पेंटागन को आदेश दिया है कि ईरान के पावर प्लांट्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले सभी सैन्य हमलों को 5 दिनों के लिए रोक दिया जाए। यह पहली बार है जब 24 दिनों के युद्ध के बाद अमेरिका ने इतने बड़े हमले को टालने का फैसला किया है।

आखिर क्यों झुकने को मजबूर हुए ट्रंप? ये हैं 3 बड़े कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह नरम रुख रणनीतिक मजबूरी भी हो सकता है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण बताए जा रहे हैं:

वैश्विक तेल संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में व्यापारिक जहाजों के फंसने से दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की किल्लत और कीमतें आसमान छू रही हैं।

सहयोगियों पर खतरा: खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों पर ईरान समर्थित गुटों के हमले थम नहीं रहे हैं।

घरेलू राजनीति: अमेरिका में होने वाले आगामी मध्यावधि चुनावों को देखते हुए ट्रंप लंबी खिंचती जंग का जोखिम नहीं उठाना चाहते, क्योंकि इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा है।

ईरान की शर्तों पर टिकी है दुनिया की नजर

भले ही मध्यस्थता की खबरें आ रही हैं, लेकिन असली चुनौती ईरान की उन शर्तों को मानना है जिनमें नुकसान की भरपाई और प्रतिबंधों को हटाने की मांग शामिल है। तुर्की और पाकिस्तान जैसे देश ईरान को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि पूर्ण युद्ध किसी के हित में नहीं है। अब देखना यह होगा कि 5 दिनों के इस 'अघोषित युद्धविराम' के बाद शांति का कोई ठोस फॉर्मूला निकलकर सामने आता है या बारूद का ढेर एक बार फिर दहक उठेगा।