Prabhat Vaibhav,Digital Desk : नासा के आर्टेमिस II मिशन ने अब एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। स्पेस लॉन्च सिस्टम रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान लॉन्च पैड 39b पर पहुंच चुके हैं। इसी बीच, आइए अपोलो और आर्टेमिस II मिशनों के बीच के अंतरों और 54 वर्षों में आए बदलावों पर एक नज़र डालते हैं।
विभिन्न लक्ष्य:
अपोलो मिशन शीत युद्ध की छाया में शुरू हुए थे। इनका प्राथमिक उद्देश्य राजनीतिक और प्रतीकात्मक था। लक्ष्य सोवियत संघ से पहले अमेरिकियों को चंद्रमा पर उतारना और तकनीकी श्रेष्ठता का प्रदर्शन करना था। गति स्थायित्व से अधिक महत्वपूर्ण थी। इसके विपरीत, आर्टेमिस II एक दीर्घकालिक अन्वेषण रणनीति का हिस्सा है। इसका लक्ष्य केवल चंद्रमा तक पहुंचना नहीं है, बल्कि विशेष रूप से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के निकट एक स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करना है। यह भविष्य के मंगल मिशनों के लिए चंद्रमा को एक आधारशिला के रूप में उपयोग करना चाहता है।
मिशन की अवधि और मानव उपस्थिति:
अपोलो मिशन छोटे और त्वरित थे। इन मिशनों के दौरान चंद्रमा पर सबसे लंबा प्रवास केवल तीन दिन का था। आर्टेमिस II मिशन लंबी अवधि के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक गहरे अंतरिक्ष मिशनों के लिए चंद्र कक्षा में ले जाएगा। भविष्य के आर्टेमिस मिशन भी चालक दल को 21 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने की अनुमति देंगे।
रॉकेट और अंतरिक्ष यान
प्रौद्योगिकी के मामले में अंतर बहुत बड़ा है। अपोलो मिशन सैटर्न वी रॉकेट पर आधारित था। आर्टेमिस II अंतरिक्ष प्रक्षेपण प्रणाली का उपयोग करता है, जो वर्तमान में दुनिया का सबसे शक्तिशाली परिचालन रॉकेट है। ओरियन अंतरिक्ष यान भी एक बड़ी छलांग है। यह अपोलो कमांड मॉड्यूल की तुलना में लगभग 50% अधिक रहने की जगह, आधुनिक जीवन रक्षक प्रणाली, उचित शौचालय और बिजली के लिए सौर पैनल प्रदान करता है।
सुरक्षा मानक और जीवन रक्षक प्रणालियाँ:
सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तनों में से एक सुरक्षा है। अपोलो अंतरिक्ष यान ने शुद्ध ऑक्सीजन वातावरण का उपयोग किया था, जो अपोलो 1 के जमीनी परीक्षण के दौरान घातक साबित हुआ। ओरियन पृथ्वी के वातावरण के समान एक सुरक्षित नाइट्रोजन-ऑक्सीजन मिश्रण का उपयोग करता है। आधुनिक कंप्यूटिंग, दोष पहचान प्रणाली और अतिरिक्त सुरक्षा तंत्रों ने जोखिमों को काफी हद तक कम कर दिया है।
टिकाऊपन और पुन: प्रयोज्यता:
अपोलो हार्डवेयर को एक बार उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया था। उपयोग के बाद अधिकांश घटकों को फेंक दिया जाता था। आर्टेमिस मानव लैंडिंग प्रणाली और नियोजित चंद्र गेटवे अंतरिक्ष स्टेशन जैसी प्रणालियाँ कई मिशनों में पुन: उपयोग के लिए डिज़ाइन की गई हैं। उन्नत सामग्री, मिश्रित संरचनाएँ और 3डी मुद्रित घटक भी अंतरिक्ष यानों को हल्का, मजबूत और दीर्घकालिक अन्वेषण के लिए अधिक उपयुक्त बना रहे हैं।




