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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : खांसी, जुकाम, बुखार या गले में खराश जैसी आम बीमारियों में बिना डॉक्टर की सलाह एंटीबायोटिक लेना अब एक खतरनाक चलन बनता जा रहा है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत धीरे-धीरे एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) को बढ़ावा दे रही है, जिससे भविष्य में गंभीर संक्रमणों का इलाज मुश्किल ही नहीं, बल्कि कभी-कभी नामुमकिन भी हो सकता है।

छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, बड़ी संख्या में लोग मामूली लक्षणों पर सीधे कैमिस्ट से एंटीबायोटिक खरीदकर सेवन कर रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यही लापरवाही आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकती है।

क्या है एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस?

एएमआर वह स्थिति है, जब बैक्टीरिया, वायरस या परजीवी दवाओं के खिलाफ खुद को मजबूत बना लेते हैं। नतीजा यह होता है कि जो दवाएं पहले असरदार थीं, वे बेअसर हो जाती हैं। इससे इलाज लंबा, महंगा और जटिल हो जाता है।

बिना पर्ची मिल रही एंटीबायोटिक बनी बड़ी वजह

आईएमए लुधियाना के अध्यक्ष डॉ. पवन ढींगरा बताते हैं कि एंटीबायोटिक दवाओं की आसान उपलब्धता इस संकट की सबसे बड़ी वजह है। मरीज अक्सर इंटरनेट पर लक्षण खोजते हैं और खुद ही दवा तय कर लेते हैं। कई बार बिना डॉक्टर की पर्ची के कैमिस्ट से एंटीबायोटिक मिल जाती है।

जब इन दवाओं से तुरंत राहत नहीं मिलती, तो मरीज गली-मोहल्लों में बैठे तथाकथित इलाज करने वालों यानी झोलाछाप डॉक्टरों के पास पहुंच जाते हैं, जो बिना सही जांच के भारी एंटीबायोटिक और स्टेरॉयड तक दे देते हैं।

वायरल बीमारी में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं

डॉक्टरों का साफ कहना है कि सामान्य फ्लू, सर्दी-खांसी, डेंगू, चिकनगुनिया या वायरल बुखार में एंटीबायोटिक की कोई भूमिका नहीं होती। ये दवाएं सिर्फ बैक्टीरियल इंफेक्शन में, वह भी जांच के बाद ही दी जाती हैं।

जैसे पेशाब में संक्रमण, घाव में पस, सर्जरी के बाद इंफेक्शन या गंभीर बैक्टीरियल बीमारी—इन मामलों में डॉक्टर जांच के आधार पर सही एंटीबायोटिक चुनते हैं।

अधूरा कोर्स बना देता है बैक्टीरिया को ताकतवर

डॉ. ढींगरा के अनुसार, एंटीबायोटिक का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी है। जब मरीज एक-दो दिन में दवा बंद कर देता है, तो बैक्टीरिया पूरी तरह खत्म नहीं होते, बल्कि और ज्यादा मजबूत हो जाते हैं। अगली बार वही दवा असर नहीं करती और ज्यादा ताकतवर दवाएं देनी पड़ती हैं।

बच्चों और बुजुर्गों में खतरा ज्यादा

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों में सेल्फ-मेडिकेशन का चलन तेजी से बढ़ रहा है। अभिभावक मामूली बुखार या खांसी में बच्चों को एंटीबायोटिक दे देते हैं। कुछ समय बाद जब गंभीर संक्रमण होता है, तो सामान्य दवाएं बेअसर साबित होती हैं।

डॉक्टरों की साफ सलाह

मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि

एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर लें

बिना जरूरत दवा न शुरू करें

पूरा कोर्स जरूर पूरा करें

वायरल और बैक्टीरियल बीमारी में फर्क समझें

लापरवाही आज भले राहत दे दे, लेकिन कल यही आदत सुपरबग जैसी खतरनाक समस्या को जन्म दे सकती है।