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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पंजाब की कपूरथला अदालत में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आरोपियों की जमानत करवाने के एक बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। न्यायिक प्रक्रिया में सेंध लगाने की इस कोशिश पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। दस्तावेजों की स्क्रूटनी के दौरान हुए इस खुलासे के बाद थाना सदर पुलिस ने चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। इस घटना ने कोर्ट परिसर में सक्रिय 'जमानती गिरोह' की चर्चाओं को एक बार फिर हवा दे दी है।

आधार कार्ड की जांच में खुली पोल

पूरा मामला साल 2019 के एक पुराने केस से जुड़ा है। आरोपी कुलविंदर सिंह उर्फ कमल (निवासी गांव गड़ानी) की जमानत के लिए 11 दिसंबर 2023 को अदालत में अर्जी लगाई गई थी। जमानत की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए प्रदीप सिंह, मनजीत सिंह और सुरजीत सिंह (सभी निवासी मुकेरियां, जिला होशियारपुर) ने कोर्ट में अपने आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्र पेश किए थे।

रीडर की शिकायत पर पुलिस की कार्रवाई

मामला तब संगीन हो गया जब जज नवजीतपाल कौर की अदालत के रीडर ने दस्तावेजों की गहनता से जांच की। जांच में पाया गया कि जमानत के लिए जमा किए गए आधार कार्ड और अन्य कागजात पूरी तरह फर्जी और जाली थे। फर्जीवाड़े की पुष्टि होते ही अदालत के आदेश पर थाना सदर में कुलविंदर सिंह समेत चारों आरोपियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

संगठित गिरोह की संलिप्तता का शक

जांच अधिकारी एएसआई लखबीर सिंह ने बताया कि पुलिस इस मामले के हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। पुलिस को संदेह है कि इसके पीछे कोई संगठित गिरोह काम कर रहा है। जांच इस बात पर भी केंद्रित है कि फर्जी दस्तावेज बनाने में किन लोगों की मदद ली गई और क्या इसमें किसी पेशेवर गिरोह का हाथ है।

पहले भी सामने आ चुके हैं ऐसे मामले

कपूरथला कोर्ट परिसर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जमानत लेने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई ऐसे गिरोहों का पर्दाफाश हो चुका है, जिनमें अर्जी नवीस और वकीलों के मुंशी तक शामिल पाए गए थे। बार-बार हो रही इन घटनाओं ने अदालती कामकाज की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।