img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। नौ साल पुराने मानहानि के एक मामले में शुक्रवार को चंडीगढ़ जिला अदालत में उनकी पेशी होनी थी, लेकिन वे एक बार फिर अदालत में हाजिर नहीं हुए। एक महीने के भीतर यह तीसरी बार है जब बादल ने व्यक्तिगत पेशी से छूट मांगी है। अदालत ने उनकी अर्जी स्वीकार तो कर ली है, लेकिन सख्त लहजे में अगली तारीख पर पेश होने का आदेश दिया है।

पार्टी मीटिंग का दिया हवाला, वकील ने दी सफाई

अदालत में सुखबीर बादल के वकील ने एक अर्जी दायर कर बताया कि बादल को दिल्ली में पार्टी की एक बेहद जरूरी मीटिंग में शामिल होना है, जिस कारण वे व्यक्तिगत रूप से पेश होने में असमर्थ हैं। हालांकि, बार-बार पेशी से बचने की कोशिशों पर अब सवाल उठने लगे हैं। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 मार्च 2026 की तारीख तय की है और स्पष्ट किया है कि अगली बार उन्हें कोर्ट में उपस्थित होना होगा।

क्या है 9 साल पुराना मानहानि मामला?

यह विवाद साल 2017 से जुड़ा है। धार्मिक संगठन 'अखंड कीर्तनी जत्था' के प्रवक्ता राजिंदर पाल सिंह ने सुखबीर बादल के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया था। बादल पर आरोप है कि उन्होंने मीडिया के सामने जत्थे के खिलाफ कथित तौर पर विवादित और आपत्तिजनक बयान दिए थे, जिससे संगठन की छवि को नुकसान पहुंचा।

गैर-जमानती वारंट और सरेंडर का घटनाक्रम

इस केस में सुखबीर बादल की मुश्किलें तब बढ़ गई थीं जब करीब दो महीने पहले लगातार गैर-हाजिर रहने पर अदालत ने उनके खिलाफ नॉन-बेलेबल वारंट (गैर-जमानती वारंट) जारी कर दिए थे। इसके बाद कानूनी शिकंजा कसता देख बादल ने 17 जनवरी को कोर्ट में सरेंडर किया था, जहां से उन्हें जमानत मिल गई थी। जमानत मिलने के बाद भी वे पिछले एक महीने में तीन बार सुनवाई के दौरान व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए हैं।

अगली सुनवाई पर टिकी नजरें

राजिंदर पाल सिंह की ओर से दायर इस याचिका पर पिछले कई सालों से कानूनी बहस जारी है। अब 23 मार्च को होने वाली सुनवाई काफी अहम मानी जा रही है। यदि सुखबीर बादल अगली तारीख पर भी पेश नहीं होते हैं, तो कोर्ट उनके खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए उनकी जमानत रद्द करने या दोबारा वारंट जारी करने जैसे कदम उठा सकता है।