img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : माइग्रेन केवल एक साधारण सिरदर्द नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर तंत्रिका संबंधी (Neurological) समस्या है। इसमें होने वाला दर्द इतना तीव्र होता है कि मरीज को हल्की सी रोशनी या धीमी आवाज भी बर्दाश्त नहीं होती। कई बार लोग अनजाने में ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे माइग्रेन का हमला (Migraine Attack) और भी भयावह हो जाता है। यदि आप भी सिर के एक हिस्से में होने वाले इस असहनीय दर्द से जूझ रहे हैं, तो स्थिति को गंभीर होने से बचाने के लिए अपनी आदतों में तुरंत सुधार करें।

माइग्रेन के लक्षण: जब सिर में महसूस होने लगे झुनझुनी

माइग्रेन के लक्षण सामान्य सिरदर्द से काफी अलग और तकलीफदेह होते हैं। शोध के अनुसार, मस्तिष्क में सेरोटोनिन जैसे रसायनों की कमी तंत्रिका तंत्र को अति-संवेदनशील बना देती है, जिसके परिणामस्वरूप ये लक्षण दिखते हैं:

सिर के एक हिस्से में सुई चुभने जैसा तेज दर्द।

उल्टी या जी मिचलाना (Nausea)।

तेज रोशनी और शोर से सख्त चिड़चिड़ाहट।

आंखों के सामने धुंधलापन या चमक दिखाई देना।

बोलने में कठिनाई या सिर में झुनझुनी महसूस होना।

माइग्रेन के दौरान इन 3 गलतियों से बचें

1. नींद के साथ समझौता और स्क्रीन का मोह:

पर्याप्त नींद न लेना माइग्रेन का सबसे बड़ा ट्रिगर है। यदि आप प्रतिदिन 7-8 घंटे की गहरी नींद नहीं लेते हैं, तो आपका दिमाग शांत नहीं रह पाता। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी इस दर्द को कई गुना बढ़ा सकती है।

2. शोरगुल और तेज म्यूजिक का शौक:

माइग्रेन के मरीजों के लिए शोर किसी दुश्मन से कम नहीं है। तेज आवाजें नसों में तनाव पैदा करती हैं। यदि दर्द महसूस हो रहा हो, तो तुरंत किसी शांत और अंधेरे कमरे में चले जाएं। तेज संगीत या भीड़भाड़ वाली जगहों से दूरी बनाना ही समझदारी है।

3. लंबे समय तक खाली पेट रहना और कैफीन का अधिक सेवन:

अक्सर लोग काम की व्यस्तता में खाना छोड़ देते हैं। लंबे समय तक खाली पेट रहने से शरीर में पोषक तत्वों और शुगर लेवल की कमी होती है, जो माइग्रेन को न्योता देती है। वहीं, चाय या कॉफी (Caffeine) का अत्यधिक सेवन भी नसों में संकुचन पैदा कर दर्द को असहनीय बना देता है।

माइग्रेन से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय

डॉक्टरों और विशेषज्ञों के अनुसार, माइग्रेन को पूरी तरह खत्म करना मुश्किल है, लेकिन इसे नियंत्रित (Control) जरूर किया जा सकता है:

तनाव कम करें: योग और ध्यान (Meditation) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

ट्रिगर्स की पहचान: गौर करें कि आपको किस चीज (जैसे चॉकलेट, खास परफ्यूम या धूप) से दर्द शुरू होता है, और उनसे बचें।

हाइड्रेटेड रहें: दिन भर पर्याप्त पानी पिएं और संतुलित आहार लें।

नियमितता: सोने और जागने का एक निश्चित समय तय करें।