Prabhat Vaibhav,Digital Desk : चार साल पहले रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े गए आईएएस अधिकारी परमजीत सिंह की कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अब उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी चलेगा। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चंडीगढ़ जिला अदालत में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी है। इससे पहले सीबीआई की जांच में उनके पास आय से कहीं अधिक संपत्ति मिलने का खुलासा हो चुका है।
सीबीआई ट्रैप से शुरू हुआ था पूरा मामला
परमजीत सिंह उस समय पंजाब परिवहन विभाग में निदेशक पद पर तैनात थे। 28 जनवरी 2022 को विभाग के ही एक कर्मचारी ने सीबीआई में शिकायत दी थी कि उसकी पदोन्नति लंबित है और डिपार्टमेंटल प्रमोशन कमेटी के प्रमुख होने के नाते परमजीत सिंह ने प्रमोशन के बदले रिश्वत मांगी। शुरुआत में पांच लाख रुपये की मांग की गई, लेकिन बाद में दो लाख रुपये पर सौदा तय हुआ।
रंगे हाथों गिरफ्तारी, फिर खुलती गईं परतें
सीबीआई ने शिकायत के आधार पर ट्रैप लगाया और दो लाख रुपये लेते हुए परमजीत सिंह को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद जांच का दायरा बढ़ा तो आय से अधिक संपत्ति का मामला भी सामने आया। इसके बाद सीबीआई ने उनकी आमदनी, खर्च और संपत्तियों की विस्तृत जांच शुरू की।
घर से 49 लाख कैश, 59 लाख का कोई हिसाब नहीं
जांच के दौरान सीबीआई को उनके घर से 49 लाख रुपये नकद बरामद हुए। आय और संपत्ति के मिलान में पता चला कि उन्होंने 1228 प्रतिशत तक अधिक संपत्ति बनाई है। इसके अलावा 59 लाख रुपये ऐसे पाए गए, जिनका कोई वैध हिसाब नहीं था। इसी आधार पर सितंबर 2022 में आय से अधिक संपत्ति का केस भी दर्ज किया गया।
ईडी ने दर्ज किया मनी लॉन्ड्रिंग का केस
रिश्वत और आय से अधिक संपत्ति के मामलों के बाद ईडी ने भी इस प्रकरण में दखल दिया। ईडी ने काले धन के लेनदेन की जांच शुरू की और परमजीत सिंह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया। करीब चार साल तक चली जांच के बाद अब ईडी ने चंडीगढ़ जिला अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी है।
अब तीन मोर्चों पर कानूनी लड़ाई
रिश्वत, आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग—तीनों मामलों में फंसने के बाद आईएएस अधिकारी की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।




