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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव अब अपने चरम पर पहुँच गया है। इज़राइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए भीषण हमलों के जवाब में ईरान ने अब तक का सबसे बड़ा पलटवार किया है। शनिवार सुबह ईरान ने सऊदी अरब स्थित प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाकर ताबड़तोड़ मिसाइलें दागीं। इस हमले में अमेरिकी वायुसेना के 10 सैनिकों के घायल होने और ईंधन भरने वाले 5 विशालकाय विमानों के क्षतिग्रस्त होने की खबर है। इस हमले के बाद पूरी दुनिया में 'तीसरे विश्व युद्ध' की आहट सुनाई देने लगी है।

प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर बरसीं मिसाइलें: अमेरिकी विमानों को भारी नुकसान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की ओर से दागी गई मिसाइलों ने सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाया। हमले में अमेरिकी वायुसेना के पांच 'एरियल रिफ्यूलिंग' (हवा में ईंधन भरने वाले) विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि ये विमान पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं और उनकी मरम्मत की कोशिश की जा रही है। इस हमले में 10 अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की पुष्टि हुई है, जिनमें से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने यह कदम अपने क्षेत्र में हुए हमलों का बदला लेने के लिए उठाया है।

ईरान में अमेरिका-इज़राइल की बमबारी: महिलाओं और बच्चों समेत 20 की मौत

ईरान द्वारा किए गए इस हमले की पृष्ठभूमि शुक्रवार को तैयार हुई थी, जब अमेरिका और इज़राइल ने पश्चिमी ईरान के करमानशाह प्रांत पर घातक बमबारी की थी। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, इस हमले में कम से कम 20 निर्दोष लोग मारे गए हैं, जिनमें महिलाएं, बच्चे और एक गर्भवती महिला भी शामिल है। करखानेह गांव और करमानशाह शहर के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाने के कारण स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी संप्रभुता पर हुए किसी भी प्रहार का मुंहतोड़ जवाब देगा।

ट्रंप का बड़ा बयान: युद्ध खत्म होते ही इज़राइल-सऊदी आएंगे करीब

इस भीषण तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। मियामी में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ जारी यह संघर्ष समाप्त होने के बाद सऊदी अरब और इज़राइल के संबंधों को सामान्य करने का सही समय होगा। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि दोनों देशों को 'अब्राहम समझौते' (Abraham Accords) का हिस्सा बनना चाहिए। हालांकि, सऊदी अरब अब भी अपनी इस मांग पर अड़ा है कि जब तक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राष्ट्र का रास्ता साफ नहीं होता, तब तक संबंधों को सामान्य करना मुश्किल है।