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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारतीय रेलवे अपने करोड़ों यात्रियों को एक बड़ा तोहफा देने की तैयारी में है। अगर आप भी अक्सर ट्रेन से सफर करते हैं और ऐन मौके पर बोर्डिंग स्टेशन (जहां से ट्रेन पकड़नी है) बदलने की जरूरत पड़ती है, तो यह खबर आपके चेहरे पर मुस्कान ला देगी। रेलवे बोर्ड एक ऐसे क्रांतिकारी प्रस्ताव पर विचार कर रहा है, जिसके लागू होने के बाद यात्री चार्ट तैयार होने के बाद भी अपना बोर्डिंग पॉइंट बदल सकेंगे।

चार्ट बनने के बाद भी मिलेगा बदलाव का मौका

वर्तमान नियमों के मुताबिक, यात्री केवल तभी तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं जब तक कि पहला रिजर्वेशन चार्ट तैयार नहीं हो जाता। आमतौर पर यह चार्ट ट्रेन छूटने से 4 से 6 घंटे पहले (कुछ मामलों में 20 घंटे पहले) बन जाता है। इसके बाद किसी भी तरह का बदलाव संभव नहीं होता। लेकिन नए प्रस्ताव के तहत, अब यात्री दूसरे रिजर्वेशन चार्ट के तैयार होने तक यह बदलाव कर सकेंगे। इसका मतलब है कि ट्रेन प्रस्थान से महज 5 से 30 मिनट पहले तक आप अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल पाएंगे।

वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों के लिए भी खास नियम

रेलवे का यह नया प्रस्ताव केवल साधारण मेल या एक्सप्रेस ट्रेनों तक सीमित नहीं है। वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड और प्रीमियम ट्रेनों के लिए भी नियमों में ढील दी जा सकती है। प्रस्ताव के अनुसार, वंदे भारत के यात्री ट्रेन छूटने से 15 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन ऑनलाइन या काउंटर के जरिए बदल सकेंगे। इससे उन यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें अंतिम समय में ट्रैफिक या किसी अन्य कारण से दूसरे नजदीकी स्टेशन से ट्रेन पकड़नी पड़ती है।

टिकट कैंसिलेशन के झंझट से मिलेगी मुक्ति

अक्सर देखा गया है कि अगर कोई यात्री अपने तय स्टेशन पर नहीं पहुंच पाता, तो उसे डर रहता है कि उसकी सीट 'नो शो' (No Show) के कारण किसी और को अलॉट कर दी जाएगी। इस डर से कई बार यात्री महंगी टिकट कैंसिल करा देते हैं। रेलवे बोर्ड का मानना है कि इस सुविधा के विस्तार से यात्रियों को न केवल सहूलियत होगी, बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान से भी बचाया जा सकेगा। यह कदम साल 2019 के कमर्शियल सर्कुलर (CC 17) का एक बड़ा अपग्रेड माना जा रहा है।

CRIS की रिपोर्ट का इंतजार, जल्द लागू हो सकती है सुविधा

इस हाई-टेक बदलाव को जमीन पर उतारने के लिए रेलवे बोर्ड ने CRIS (Center for Railway Information Systems) को तकनीकी व्यवहार्यता (Technical Feasibility) जांचने के निर्देश दिए हैं। CRIS यह देखेगा कि क्या रेलवे का सॉफ्टवेयर सिस्टम इतने कम समय में रियल-टाइम अपडेट्स को संभाल सकता है। जैसे ही CRIS अपनी हरी झंडी देगा, सॉफ्टवेयर में बदलाव कर इसे पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।