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Prabhat Vaibhav,Digital Desk : साल 2026 का पहला चंद्र ग्रहण आज यानी 3 मार्च को लगने जा रहा है। खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से यह घटना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इस बार पूर्णिमा और भद्रा तिथि के साथ ग्रहण का दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस विशेष स्थिति के कारण आज आसमान में चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा, जिसे 'रक्त चंद्रमा' या 'ब्लड मून' (Blood Moon) कहा जाता है। भारत के कई हिस्सों में यह ग्रहण अलग-अलग रूपों में नजर आएगा, जिसका सीधा असर राशियों और जनजीवन पर पड़ने वाला है।

भारत में ग्रहण का समय और स्वरूप

ज्योतिषीय गणना के अनुसार, इस चंद्र ग्रहण की शुरुआत भारतीय समयानुसार दोपहर 3:20 बजे होगी और इसका समापन शाम 6:48 बजे होगा। हालांकि, भारत में यह ग्रहण पूर्ण रूप से केवल पूर्वी राज्यों जैसे अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम बंगाल में 'खग्रास' रूप में दिखेगा। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह 'खंडग्रास' यानी आंशिक रूप से दिखाई देगा। भारत में ग्रहण की प्रभावी अवधि लगभग 25 मिनट की होगी, जो चंद्रमा के उदय होने के समय दिखेगी।

सूतक काल और वर्जित कार्य

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ग्रहण के शुरू होने से पहले ही सूतक काल प्रभावी हो जाता है, जिसे अशुभ समय माना जाता है। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के शुभ कार्य, भोजन पकाने या खाने की मनाही होती है। ज्योतिषी डॉ. अनीश व्यास के अनुसार, साल 2026 में दो चंद्र ग्रहण होंगे, लेकिन भारत में केवल आज वाला (3 मार्च) ही दिखाई देगा। 28 अगस्त को होने वाला दूसरा ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं होगा।

सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र पर प्रभाव

यह चंद्र ग्रहण सिंह राशि और पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में लग रहा है। ज्योतिषियों का मानना है कि इस राशि और नक्षत्र में जन्मे लोगों के लिए यह समय थोड़ा कष्टकारी हो सकता है। ग्रहण के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए मंत्रों का जाप, दान-पुण्य और ग्रहण के बाद औषधीय स्नान करने की सलाह दी गई है। खासकर गर्भवती महिलाओं और बीमार व्यक्तियों को इस दौरान विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

दुनिया के इन देशों में भी दिखेगा नजारा

भारत के अलावा यह खगोलीय घटना पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, अमेरिका और रूस के कुछ हिस्सों में देखी जा सकेगी। अर्जेंटीना, ब्राजील और कजाकिस्तान जैसे देशों में भी चंद्रमा के उदय और अस्त के समय ग्रहण के विभिन्न चरण दिखाई देंगे। चूंकि भारत में यह ग्रहण केवल इसके समापन के समय (शाम के समय) ही दिखाई देगा, इसलिए स्थानीय चंद्रोदय के समय को ही ग्रहण का समय माना जाएगा।