img

Prabhat Vaibhav,Digital Desk : भारत में बदलती जीवनशैली और खान-पान के बीच एक 'साइलेंट किलर' बीमारी महिलाओं और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रही है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में हर 10 में से 1 वयस्क 'हाइपोथायरायडिज्म' (Hypothyroidism) से जूझ रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि देश की एक बड़ी आबादी 'बॉर्डरलाइन थायराइड' का शिकार है, जिसके लक्षण इतने मामूली होते हैं कि लोग इन्हें थकान या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। अगर आपकी भी ब्लड रिपोर्ट में टीएसएच (TSH) का स्तर थोड़ा ऊपर-नीचे आ रहा है, तो यह खबर आपके लिए चेतावनी है।

क्या आपकी रिपोर्ट 'बॉर्डरलाइन' है? डॉक्टर से समझें इसका मतलब

अक्सर नियमित स्वास्थ्य जांच में देखा जाता है कि टीएसएच का स्तर थोड़ा बढ़ा हुआ है, लेकिन टी3 और टी4 सामान्य सीमा के भीतर होते हैं। मेडिकल भाषा में इसे 'सबक्लिनिकल हाइपोथायरायडिज्म' या बॉर्डरलाइन कहा जाता है। विशेषज्ञ डॉ. वंदना बुभाना के अनुसार, चूंकि इसमें मरीज को तत्काल कोई बड़ी तकलीफ नहीं होती, इसलिए अक्सर रिपोर्ट को खारिज कर दिया जाता है। लेकिन यही वह समय है जब शरीर आपको आने वाली बड़ी मुसीबत का संकेत दे रहा होता है। असली खतरा रिपोर्ट के एक आंकड़े में नहीं, बल्कि समय के साथ आपके शरीर में पनप रहे हार्मोनल असंतुलन में है।

महिलाओं पर क्यों टूट रहा है थायराइड का कहर?

आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं इस बीमारी की सॉफ्ट टारगेट हैं। इसके पीछे कई जैविक और हार्मोनल कारण जिम्मेदार हैं:

प्रेगनेंसी और प्रसवोत्तर बदलाव: गर्भावस्था की प्लानिंग से लेकर प्रसव के बाद तक शरीर में भारी हार्मोनल उतार-चढ़ाव होते हैं। इस दौरान थायराइड का अनियंत्रित होना मां और शिशु दोनों की जान के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

रजोनिवृत्ति (Menopause): उम्र के 40-50 के पड़ाव पर हार्मोनल बदलाव थायराइड ग्रंथि को प्रभावित करते हैं।

स्वप्रतिरक्षित रोग (Autoimmune Factors): हाशिमोटो थायराइडाइटिस, बढ़ता मोटापा, प्रदूषण और तनाव भारत में थायराइड बढ़ने के मुख्य कारण बन रहे हैं।

थकान और गिरते बालों को 'नॉर्मल' समझना बंद करें

थायराइड की सबसे बड़ी समस्या इसके अस्पष्ट लक्षण हैं। यदि आपको नीचे दिए गए बदलाव महसूस हो रहे हैं, तो यह थायराइड का संकेत हो सकता है:

बिना कारण वजन बढ़ना: अच्छी डाइट के बावजूद वजन का बढ़ना।

बालों का झड़ना: बालों का पतला होना और तेजी से गिरना।

लगातार सुस्ती: भरपूर नींद के बाद भी हल्की थकान महसूस करना।

मूड स्विंग्स: व्यवहार में चिड़चिड़ापन या उदासी का छा जाना।

बीमारी से बचाव: जांच और जीवनशैली में बदलाव

डॉक्टरों की सलाह है कि यदि आपकी रिपोर्ट बॉर्डरलाइन है, तो घबराएं नहीं बल्कि सतर्क रहें। अगर जरूरी लगे तो 6 से 12 हफ्ते बाद दोबारा टेस्ट कराएं और थायराइड एंटीबॉडी परीक्षण (TPO) पर विचार करें। आयोडीन का संतुलित सेवन करें और अपने मासिक धर्म चक्र (Periods) व वजन पर नजर रखें। हर मामले में दवा की जरूरत नहीं होती; दवा शुरू करने का निर्णय उम्र और लक्षणों की गंभीरता के आधार पर लिया जाना चाहिए।